Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.125.15: युधिष्ठिर! यह सब पापों का नाश करने वाला तीर्थ प्रतीत होता है। इस पवित्र स्थान में स्नान करने से तुम पवित्र हो जाओगे, जहाँ तुम्हारे सब पाप नष्ट हो जाते हैं। 15॥ | mahabharat अध्याय 3.125: अश्विनीकुमारोंका यज्ञमें भाग स्वीकार कर लेनेपर इन्द्रका संकट-मुक्त होना तथा लोमशजीके द्वारा अन्यान्य तीर्थोंके महत्त्वका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अयं हि दृश्यते पार्थ सर्वपापप्रणाशन:।
अत्रोपस्पृश्य चैव त्वं सर्वपापप्रणाशने॥ १५॥
अनुवाद
युधिष्ठिर! यह सब पापों का नाश करने वाला तीर्थ प्रतीत होता है। इस पवित्र स्थान में स्नान करने से तुम पवित्र हो जाओगे, जहाँ तुम्हारे सब पाप नष्ट हो जाते हैं। 15॥
Yudhisthira! This appears to be a pilgrimage that destroys all sins. You will become pure by taking bath in this holy place where all your sins are removed. 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥