Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.125.12-14: तुम अपने भाइयों सहित इसमें स्नान करो और देवताओं तथा पितरों का तर्पण करो। हे राजन! भरतपुत्र! इस सरोवर तथा शिखाक्ष तीर्थ का दर्शन करके सैंधवारण्य पहुँचो और वहाँ की छोटी-छोटी नदियों का दर्शन करो। महाराज! यहाँ के सभी सरोवरों में जाकर उनके जल का स्पर्श करो। भरत! इन तीर्थों में स्थाणु (शिव) के मन्त्रों का जप करते हुए स्नान करने से तुम्हें सिद्धि प्राप्त होगी। हे पुरुषश्रेष्ठ! यह त्रेता और द्वापर के संक्रमण के समय प्रकट हुआ तीर्थ है।॥ 12-14॥   |   mahabharat अध्याय 3.125: अश्विनीकुमारोंका यज्ञमें भाग स्वीकार कर लेनेपर इन्द्रका संकट-मुक्त होना तथा लोमशजीके द्वारा अन्यान्य तीर्थोंके महत्त्वका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 125: अश्विनीकुमारोंका यज्ञमें भाग स्वीकार कर लेनेपर इन्द्रका संकट-मुक्त होना तथा लोमशजीके द्वारा अन्यान्य तीर्थोंके महत्त्वका वर्णन  »  श्लोक 12-14
 
 
श्लोक  3.125.12-14 
अत्र त्वं सह सोदर्यै: पितॄन् देवांश्च तर्पय।
एतद् दृष्ट्वा महीपाल सिकताक्षं च भारत॥ १२॥
सैन्धवारण्यमासाद्य कुल्यानां कुरु दर्शनम्।
पुष्करेषु महाराज सर्वेषु च जलं स्पृश॥ १३॥
स्थाणोर्मन्त्राणि च जपन् सिद्धिं प्राप्स्यसि भारत।
संधिर्द्वयोर्नरश्रेष्ठ त्रेताया द्वापरस्य च॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तुम अपने भाइयों सहित इसमें स्नान करो और देवताओं तथा पितरों का तर्पण करो। हे राजन! भरतपुत्र! इस सरोवर तथा शिखाक्ष तीर्थ का दर्शन करके सैंधवारण्य पहुँचो और वहाँ की छोटी-छोटी नदियों का दर्शन करो। महाराज! यहाँ के सभी सरोवरों में जाकर उनके जल का स्पर्श करो। भरत! इन तीर्थों में स्थाणु (शिव) के मन्त्रों का जप करते हुए स्नान करने से तुम्हें सिद्धि प्राप्त होगी। हे पुरुषश्रेष्ठ! यह त्रेता और द्वापर के संक्रमण के समय प्रकट हुआ तीर्थ है।॥ 12-14॥
 
You, along with your brothers, take a bath in it and offer oblations to the gods and forefathers. O King! Son of Bharat! After visiting this lake and the Sikhataksha Tirtha, reach Saindhavaranya and visit the small rivers there. Maharaj! Go to all the ponds here and touch the water. Bharat! You will attain siddhi by taking a bath in these Tirthas while chanting the mantras of Sthānu (Shiva). O best of men! This is a Tirtha that appeared at the time of the transition of Treta and Dvapara.॥ 12-14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)