Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.124.9: इन्द्र बोले - मुने ! मेरा मत है कि ये दोनों अश्विनी कुमार यज्ञ में सोम पीने के अधिकारी नहीं हैं; क्योंकि ये द्युलोक में रहने वाले देवताओं के वैद्य हैं और वैद्य होने के कारण इन्हें यज्ञ में सोम पीने का अधिकार नहीं रह गया है ॥9॥ | mahabharat अध्याय 3.124: शर्यातिके यज्ञमें च्यवनका इन्द्रपर कोप करके वज्रको स्तम्भित करना और उसे मारनेके लिये मदासुरको उत्पन्न करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इन्द्र उवाच
उभावेतौ न सोमार्हौ नासत्याविति मे मति:।
भिषजौ दिवि देवानां कर्मणा तेन नार्हत:॥ ९॥
अनुवाद
इन्द्र बोले - मुने ! मेरा मत है कि ये दोनों अश्विनी कुमार यज्ञ में सोम पीने के अधिकारी नहीं हैं; क्योंकि ये द्युलोक में रहने वाले देवताओं के वैद्य हैं और वैद्य होने के कारण इन्हें यज्ञ में सोम पीने का अधिकार नहीं रह गया है ॥9॥
Indra said – Mune! My theory is that these two Ashwini Kumars are not entitled to drink the soma in the Yagya; Because he is the physician of the gods residing in Dyuloka and due to his profession as a physician, he no longer has the right to drink Soma in the Yagya. 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥