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mahabharat 3.124.6: तदनन्तर जब यज्ञ का शुभ दिन आया, तब शर्यात ने एक उत्तम यज्ञ मण्डप तैयार करवाया, जो समस्त अभीष्ट वस्तुओं से परिपूर्ण था ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 3.124: शर्यातिके यज्ञमें च्यवनका इन्द्रपर कोप करके वज्रको स्तम्भित करना और उसे मारनेके लिये मदासुरको उत्पन्न करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 124: शर्यातिके यज्ञमें च्यवनका इन्द्रपर कोप करके वज्रको स्तम्भित करना और उसे मारनेके लिये मदासुरको उत्पन्न करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.124.6 
प्रशस्तेऽहनि यज्ञीये सर्वकामसमृद्धिमत्।
कारयामास शर्यातिर्यज्ञायतनमुत्तमम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर जब यज्ञ का शुभ दिन आया, तब शर्यात ने एक उत्तम यज्ञ मण्डप तैयार करवाया, जो समस्त अभीष्ट वस्तुओं से परिपूर्ण था ॥6॥
 
Subsequently, when an auspicious day came for the Yagya, Sharyat got an excellent Yagya Mandap prepared, which was filled with all the desired blessings. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)