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mahabharat 3.124.5: महाराज! यह सुनकर राजा शर्याति बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने च्यवन ऋषि के वचनों की प्रशंसा की।   |   mahabharat अध्याय 3.124: शर्यातिके यज्ञमें च्यवनका इन्द्रपर कोप करके वज्रको स्तम्भित करना और उसे मारनेके लिये मदासुरको उत्पन्न करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 124: शर्यातिके यज्ञमें च्यवनका इन्द्रपर कोप करके वज्रको स्तम्भित करना और उसे मारनेके लिये मदासुरको उत्पन्न करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.124.5 
तत: परमसंहृष्ट: शर्यातिरवनीपति:।
च्यवनस्य महाराज तद् वाक्यं प्रत्यपूजयत्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! यह सुनकर राजा शर्याति बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने च्यवन ऋषि के वचनों की प्रशंसा की।
 
Maharaj! On hearing this, King Sharyati became very happy and he praised the words of the sage Chyavana. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)