श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 124: शर्यातिके यज्ञमें च्यवनका इन्द्रपर कोप करके वज्रको स्तम्भित करना और उसे मारनेके लिये मदासुरको उत्पन्न करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.124.4 
अथैनं भार्गवो राजन्नुवाच परिसान्त्वयन्।
याजयिष्यामि राजंस्त्वां सम्भारानवकल्पय॥ ४॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! तत्पश्चात भृगुनन्दन च्यवन ने उन्हें सान्त्वना देते हुए कहा - 'हे राजन! मैं आपसे यज्ञ कराऊँगा। आप सामग्री एकत्रित कर लीजिए।'
 
Yudhisthira! After that, Bhrigunandan Chyawan consoled him and said - 'O King! I will make you perform a yagya. You collect the material. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)