Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.124.17: तब शचीपति इन्द्र ने उस पर भयंकर वज्र बरसाना आरम्भ किया, किन्तु ज्यों ही उसने प्रहार करना आरम्भ किया, त्यों ही भृगुणानन्द च्यवन ने उसकी भुजा को स्तब्ध कर दिया ॥17॥ | mahabharat अध्याय 3.124: शर्यातिके यज्ञमें च्यवनका इन्द्रपर कोप करके वज्रको स्तम्भित करना और उसे मारनेके लिये मदासुरको उत्पन्न करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब शचीपति इन्द्र ने उस पर भयंकर वज्र बरसाना आरम्भ किया, किन्तु ज्यों ही उसने प्रहार करना आरम्भ किया, त्यों ही भृगुणानन्द च्यवन ने उसकी भुजा को स्तब्ध कर दिया ॥17॥
Then Sachipati Indra began to shoot terrible thunderbolts at him, but as soon as he began to attack, Bhriguṇānanda Chyavana paralyzed his arm. ॥17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥