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mahabharat 3.124.15: ब्रह्मन्! यदि तुम स्वयं इन दोनों के लिए सोमरस ग्रहण करोगे, तो मैं तुम पर अपना अत्यन्त उत्तम एवं भयंकर वज्र छोड़ूँगा॥15॥   |   mahabharat अध्याय 3.124: शर्यातिके यज्ञमें च्यवनका इन्द्रपर कोप करके वज्रको स्तम्भित करना और उसे मारनेके लिये मदासुरको उत्पन्न करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 124: शर्यातिके यज्ञमें च्यवनका इन्द्रपर कोप करके वज्रको स्तम्भित करना और उसे मारनेके लिये मदासुरको उत्पन्न करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.124.15 
आभ्यामर्थाय सोमं त्वं ग्रहीष्यसि यदि स्वयम्।
वज्रं ते प्रहरिष्यामि घोररूपमनुत्तमम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मन्! यदि तुम स्वयं इन दोनों के लिए सोमरस ग्रहण करोगे, तो मैं तुम पर अपना अत्यन्त उत्तम एवं भयंकर वज्र छोड़ूँगा॥15॥
 
Brahman! If you yourself take Somras for these two, then I will release my most excellent and fierce thunderbolt on you. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)