श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 124: शर्यातिके यज्ञमें च्यवनका इन्द्रपर कोप करके वज्रको स्तम्भित करना और उसे मारनेके लिये मदासुरको उत्पन्न करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.124.1 
लोमश उवाच
तत: शुश्राव शर्यातिर्वयस्थं च्यवनं कृतम्।
सुहृष्ट: सेनया सार्धमुपायाद् भार्गवाश्रमम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
लोमशजी कहते हैं- युधिष्ठिर! तत्पश्चात राजा शर्य ने सुना कि महर्षि च्यवन युवावस्था को प्राप्त हो गए हैं; इस समाचार से वे अत्यन्त प्रसन्न हुए। वे सेना सहित महर्षि च्यवन के आश्रम पर आए॥1॥
 
Lomashji says- Yudhishthir! Thereafter King Sharya heard that Maharishi Chyavan had attained youth; He was very happy with this news. He came to Maharishi Chyavan's ashram with the army. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)