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mahabharat 3.123.d2-16: पति की यह आज्ञा पाकर सुकन्या ने अश्विनीकुमारों से कहा, ‘मेरे पति को सुन्दर और युवा बना दीजिए।’ यह सुनकर अश्विनीकुमारों ने राजकुमारी सुकन्या से कहा, ‘तुम्हारे पति इस जल में प्रवेश करें।’ तब सुन्दर रूप की इच्छा से च्यवन ऋषि शीघ्रतापूर्वक उस सरोवर के जल में प्रवेश कर गए॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.123: अश्विनीकुमारोंकी कृपासे महर्षि च्यवनको सुन्दर रूप और युवावस्थाकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 123: अश्विनीकुमारोंकी कृपासे महर्षि च्यवनको सुन्दर रूप और युवावस्थाकी प्राप्ति  »  श्लोक d2-16
 
 
श्लोक  3.123.d2-16 
(सा भर्त्रा समनुज्ञाता क्रियतामिति चाब्रवीत्।
श्रुत्वा तदश्विनौ वाक्यं तस्यास्तत् क्रियतामिति॥ )
ऊचतू राजपुत्रीं तां पतिस्तव विशत्वप:।
ततोऽम्भश्च्यवन: शीघ्रं रूपार्थी प्रविवेश ह॥ १६॥
 
 
अनुवाद
पति की यह आज्ञा पाकर सुकन्या ने अश्विनीकुमारों से कहा, ‘मेरे पति को सुन्दर और युवा बना दीजिए।’ यह सुनकर अश्विनीकुमारों ने राजकुमारी सुकन्या से कहा, ‘तुम्हारे पति इस जल में प्रवेश करें।’ तब सुन्दर रूप की इच्छा से च्यवन ऋषि शीघ्रतापूर्वक उस सरोवर के जल में प्रवेश कर गए॥16॥
 
On receiving this command from her husband, Sukanya said to the Aśvinikumaras, 'Please make my husband beautiful and youthful.' On hearing this, the Aśvinikumaras said to Princess Sukanya, 'Your husband should enter this water.' Then the sage Chyavana, desiring a beautiful form, quickly entered the water of that lake.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)