श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 123: अश्विनीकुमारोंकी कृपासे महर्षि च्यवनको सुन्दर रूप और युवावस्थाकी प्राप्ति  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.123.9 
कस्मादेवंविधा भूत्वा जराजर्जरितं पतिम्।
त्वमुपास्से ह कल्याणि कामभोगबहिष्कृतम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
कल्याणी! तुम इतनी अद्वितीय सुन्दरी होकर भी इस भोग-विलास से रहित, जीर्ण वृद्ध पति की पूजा कैसे करती हो?
 
'Kalyani! How do you, being such a unique beauty, worship this decrepit old husband devoid of sexual pleasures? 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)