श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 123: अश्विनीकुमारोंकी कृपासे महर्षि च्यवनको सुन्दर रूप और युवावस्थाकी प्राप्ति  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.123.7 
अनाभरणसम्पन्ना परमाम्बरवर्जिता।
शोभयस्यधिकं भद्रे वनमप्यनलंकृता॥ ७॥
 
 
अनुवाद
भद्रे! तुम्हारे शरीर पर कोई आभूषण नहीं है। तुम उत्तम वस्त्रों से भी वंचित हो और तुमने कोई श्रृंगार भी नहीं किया है, फिर भी तुम इस वन की शोभा को और भी बढ़ा रही हो।
 
‘Bhadre! You have no ornaments on your body. You are deprived of even the best clothes and you have not even worn any makeup, yet you are increasing the beauty of this forest more and more. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)