यह सुनकर दोनों अश्विनीकुमार प्रसन्न होकर देवलोक को लौट गए और च्यवन और सुकन्या दम्पति की भाँति रहने लगे॥24॥
Hearing this, both the Ashwini Kumars became happy and returned to the world of gods and Chyavan and Sukanya started living like a couple. 24॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि लोमशतीर्थयात्रायां सौकन्येत्रयोविंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें लोमशतीर्थयात्राप्रसंगमें सुकन्योपाख्यानविषयक एक सौ तेईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२३॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल २६ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)