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mahabharat 3.123.19: सरोवर से बाहर आकर वे सब एक स्वर में बोलीं - 'शुभ! भद्रे! वरवर्णिनी! हममें से जो तुम्हारी रुचि के अनुकूल हो, उसे तुम पति के रूप में चुन लो।॥19॥   |   mahabharat अध्याय 3.123: अश्विनीकुमारोंकी कृपासे महर्षि च्यवनको सुन्दर रूप और युवावस्थाकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 123: अश्विनीकुमारोंकी कृपासे महर्षि च्यवनको सुन्दर रूप और युवावस्थाकी प्राप्ति  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.123.19 
तेऽब्रुवन् सहिता: सर्वे वृणीष्वान्यतमं शुभे।
अस्माकमीप्सितं भद्रे पतित्वे वरवर्णिनि॥ १९॥
 
 
अनुवाद
सरोवर से बाहर आकर वे सब एक स्वर में बोलीं - 'शुभ! भद्रे! वरवर्णिनी! हममें से जो तुम्हारी रुचि के अनुकूल हो, उसे तुम पति के रूप में चुन लो।॥19॥
 
Coming out of the lake, all of them said in unison, 'Shubh! Bhadre! Varvarnini! Choose any one of us who suits your taste as your husband.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)