श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 123: अश्विनीकुमारोंकी कृपासे महर्षि च्यवनको सुन्दर रूप और युवावस्थाकी प्राप्ति  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  3.123.14-15 
सा तयोर्वचनाद् राजन्नुपसंगम्य भार्गवम्॥ १४॥
उवाच वाक्यं यत् ताभ्यामुक्तं भृगुसुतं प्रति।
तच्छ्रुत्वा च्यवनो भार्यामुवाच क्रियतामिति॥ १५॥
 
 
अनुवाद
राजा! इन दोनों की बातें सुनकर सुकन्या च्यवन मुनि के पास गई और उनसे अश्विनीकुमारों की सारी बातें कह सुनाईं। यह सुनकर च्यवन ने अपनी पत्नी से कहा - 'प्रिये! दिव्य चिकित्सकों ने जैसा कहा है वैसा ही करो।'॥14-15॥
 
King! After listening to these two, Sukanya went to Chyavan Muni and told him everything that the Ashwinikumars had said. After listening to this, Chyavan said to his wife - 'Dear! Do as the divine physicians have said.'॥ 14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)