श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 123: अश्विनीकुमारोंकी कृपासे महर्षि च्यवनको सुन्दर रूप और युवावस्थाकी प्राप्ति  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.123.10 
असमर्थं परित्राणे पोषणे तु शुचिस्मिते।
सा त्वं च्यवनमुत्सृज्य वरयस्वैकमावयो:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे निर्मल मुस्कान वाली देवी! वह वृद्ध पुरुष आपकी रक्षा और पालन-पोषण करने में भी समर्थ नहीं है। अतः आप च्यवन को त्यागकर हममें से किसी एक को अपना पति चुन लीजिए॥ 10॥
 
'O Goddess with a pure smile! That old man is not even capable of protecting and nurturing you. Therefore, leave Chyavan and choose one of us as your husband.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)