श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 122: महर्षि च्यवनको सुकन्याकी प्राप्ति  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.122.26 
लोमश उवाच
ऋषेर्वचनमाज्ञाय शर्यातिरविचारयन्।
ददौ दुहितरं तस्मै च्यवनाय महात्मने॥ २६॥
 
 
अनुवाद
लोमश कहते हैं - च्यवन ऋषि के ये वचन सुनकर राजा शर्यातिनि ने बिना कुछ सोचे-समझे अपनी पुत्री महात्मा च्यवन को दे दी।
 
Lomasha says - On hearing these words of the sage Chyavana, King Sharyatini without giving it a second thought gave his daughter to the great soul Chyavana.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas