श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 121: राजा गयके यज्ञकी प्रशंसा, पयोष्णी, वैदूर्य पर्वत और नर्मदाके माहात्म्य तथा च्यवन-सुकन्याके चरित्रका आरम्भ  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.121.23 
युधिष्ठिर उवाच
कथं विष्टम्भितस्तेन भगवान् पाकशासन:।
किमर्थं भार्गवश्चापि कोपं चक्रे महातपा:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - मुने ! भृगुपुत्र महातपस्वी महर्षि च्यवन ने इन्द्र का स्तंभ किस प्रकार खड़ा किया ? वे इन्द्र पर क्रोधित क्यों हुए ? 23॥
 
Yudhishthir asked – Mune! How did the great ascetic Maharishi Chyavan, son of Bhrigu, erect the pillar of Lord Indra? Why did he get angry at Indra? 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)