Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.121.21: तात! यह वह स्थान है जहाँ राजा शर्यात ने यज्ञ किया था, जहाँ साक्षात् इन्द्र ने अश्विनीकुमारों के साथ बैठकर सोमपान किया था॥21॥   |   mahabharat अध्याय 3.121: राजा गयके यज्ञकी प्रशंसा, पयोष्णी, वैदूर्य पर्वत और नर्मदाके माहात्म्य तथा च्यवन-सुकन्याके चरित्रका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 121: राजा गयके यज्ञकी प्रशंसा, पयोष्णी, वैदूर्य पर्वत और नर्मदाके माहात्म्य तथा च्यवन-सुकन्याके चरित्रका आरम्भ  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.121.21 
एष शर्यातियज्ञस्य देशस्तात प्रकाशते।
साक्षाद् यत्रापिबत् सोममश्विभ्यां सह कौशिक:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तात! यह वह स्थान है जहाँ राजा शर्यात ने यज्ञ किया था, जहाँ साक्षात् इन्द्र ने अश्विनीकुमारों के साथ बैठकर सोमपान किया था॥21॥
 
Tat! This is the place where King Sharyata's Yagya was performed, where Indra actually sat with the Ashwini Kumars and drank the Sompa. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)