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mahabharat 3.121.19: लोमशजी बोले- कुन्तीनन्दन! वैदूर्य पर्वत पर जाकर नर्मदा में उतरने वाला मनुष्य देवताओं और पुण्यशाली राजाओं के समान पवित्र लोकों को प्राप्त करता है॥19॥   |   mahabharat अध्याय 3.121: राजा गयके यज्ञकी प्रशंसा, पयोष्णी, वैदूर्य पर्वत और नर्मदाके माहात्म्य तथा च्यवन-सुकन्याके चरित्रका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 121: राजा गयके यज्ञकी प्रशंसा, पयोष्णी, वैदूर्य पर्वत और नर्मदाके माहात्म्य तथा च्यवन-सुकन्याके चरित्रका आरम्भ  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.121.19 
लोमश उवाच
देवानामेति कौन्तेय तथा राज्ञां सलोकताम्।
वैदूर्यपर्वतं दृष्ट्वा नर्मदामवतीर्य च॥ १९॥
 
 
अनुवाद
लोमशजी बोले- कुन्तीनन्दन! वैदूर्य पर्वत पर जाकर नर्मदा में उतरने वाला मनुष्य देवताओं और पुण्यशाली राजाओं के समान पवित्र लोकों को प्राप्त करता है॥19॥
 
Lomashji said- Kuntinandan! After visiting the Vaidurya mountain and descending into the Narmada, a person attains the holy worlds like gods and virtuous kings. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)