Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.120.27: युधिष्ठिर बोले - सत्यके! आप जो कह रहे हैं, वह आप जैसे वीर पुरुष के लिए आश्चर्य की बात नहीं है, किन्तु मेरे लिए सत्य की रक्षा ही सर्वोपरि है, राज्य प्राप्ति नहीं। केवल श्रीकृष्ण ही मुझे भली-भाँति जानते हैं और मैं भी कृष्ण के वास्तविक स्वरूप को जानता हूँ॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 3.120: सात्यकिके शौर्यपूर्ण उद्‍गार तथा युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका अनुमोदन एवं पाण्डवोंका पयोष्णी नदीके तटपर निवास   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 120: सात्यकिके शौर्यपूर्ण उद्‍गार तथा युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका अनुमोदन एवं पाण्डवोंका पयोष्णी नदीके तटपर निवास  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.120.27 
युधिष्ठिर उवाच
नेदं चित्रं माधव यद् ब्रवीषि
सत्यं तु मे रक्ष्यतमं न राज्यम्।
कृष्णस्तु मां वेद यथावदेक:
कृष्णं च वेदाहमथो यथावत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - सत्यके! आप जो कह रहे हैं, वह आप जैसे वीर पुरुष के लिए आश्चर्य की बात नहीं है, किन्तु मेरे लिए सत्य की रक्षा ही सर्वोपरि है, राज्य प्राप्ति नहीं। केवल श्रीकृष्ण ही मुझे भली-भाँति जानते हैं और मैं भी कृष्ण के वास्तविक स्वरूप को जानता हूँ॥ 27॥
 
Yudhishthira said - Satyake! What you are saying is not surprising for a brave man like you, but for me the protection of truth is the most important thing, not the attainment of the kingdom. Only Shri Krishna knows me well and I also know the true nature of Krishna.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)