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mahabharat 3.120.25: भीमसेन और अर्जुन - ये दोनों वीर इस पृथ्वी पर युद्ध में किसी के समान नहीं हैं। इनके और माद्री के दोनों पुत्रों के साथ युधिष्ठिर जब एक हो गए हैं, तब वे सम्पूर्ण पृथ्वी पर शासन क्यों न करें?॥25॥   |   mahabharat अध्याय 3.120: सात्यकिके शौर्यपूर्ण उद्‍गार तथा युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका अनुमोदन एवं पाण्डवोंका पयोष्णी नदीके तटपर निवास   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 120: सात्यकिके शौर्यपूर्ण उद्‍गार तथा युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका अनुमोदन एवं पाण्डवोंका पयोष्णी नदीके तटपर निवास  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.120.25 
उभौ हि युद्धेऽप्रतिमौ पृथिव्यां
वृकोदरश्चैव धनंजयश्च।
कस्मान्न कृत्स्नां पृथिवीं प्रशासे-
न्माद्रीसुताभ्यां च पुरस्कृतोऽयम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन और अर्जुन - ये दोनों वीर इस पृथ्वी पर युद्ध में किसी के समान नहीं हैं। इनके और माद्री के दोनों पुत्रों के साथ युधिष्ठिर जब एक हो गए हैं, तब वे सम्पूर्ण पृथ्वी पर शासन क्यों न करें?॥25॥
 
Bhimasena and Arjuna - these two heroes have no equal in war on this earth. How can Yudhishthira not rule the entire earth when he is united with them and the two sons of Madri?॥25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)