श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 120: सात्यकिके शौर्यपूर्ण उद्‍गार तथा युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका अनुमोदन एवं पाण्डवोंका पयोष्णी नदीके तटपर निवास  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.120.22 
अस्मत्प्रमुक्तैर्विशिखैर्जितारि-
स्ततो महीं भोक्ष्यति धर्मराज:।
निर्धार्तराष्ट्रां हतसूतपुत्रा-
मेतद्धि न: कृत्यतमं यशस्यम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, अपना व्रत पूर्ण करके तथा हमारे द्वारा छोड़े गए बाणों से शत्रुओं को परास्त करके धर्मराज युधिष्ठिर इस पृथ्वी का राज्य भोगेंगे। उस समय तक यह पृथ्वी धृतराष्ट्र के पुत्रों से रहित हो जाएगी और सारथिपुत्र कर्ण भी मर जाएगा। यदि ऐसा होगा, तो यह हमारे लिए महान् यशस्वी कार्य होगा॥ 22॥
 
Thereafter, after completing his fast and defeating his enemies with the arrows shot by us, Dharmaraja Yudhishthira will enjoy the rule of this earth. By that time, this earth will be devoid of Dhritarashtra's sons and charioteer's son Karna will also die. If this happens, it will be a great glorious deed for us.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)