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mahabharat 3.120.2: इस संसार में जिनकी देख-रेख होती है - जिनके बहुत से सहायक होते हैं - वे स्वयं कोई कार्य आरम्भ नहीं करते। उनके सभी कार्यों में उनके सहायक और मित्र ही उनकी सहायता करते हैं, जैसे ययाति के मोक्ष कार्य में शिबि आदि उनके पौत्रों ने सहयोग दिया था॥2॥   |   mahabharat अध्याय 3.120: सात्यकिके शौर्यपूर्ण उद्‍गार तथा युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका अनुमोदन एवं पाण्डवोंका पयोष्णी नदीके तटपर निवास   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 120: सात्यकिके शौर्यपूर्ण उद्‍गार तथा युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका अनुमोदन एवं पाण्डवोंका पयोष्णी नदीके तटपर निवास  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.120.2 
ये नाथवन्तोऽद्य भवन्ति लोके
ते नात्मना कर्म समारभन्ते।
तेषां तु कार्येषु भवन्ति नाथा:
शिब्यादयो राम यथा ययाते:॥ २॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में जिनकी देख-रेख होती है - जिनके बहुत से सहायक होते हैं - वे स्वयं कोई कार्य आरम्भ नहीं करते। उनके सभी कार्यों में उनके सहायक और मित्र ही उनकी सहायता करते हैं, जैसे ययाति के मोक्ष कार्य में शिबि आदि उनके पौत्रों ने सहयोग दिया था॥2॥
 
In this world, those who are cared for - who have many helpers - they do not start any work themselves. In all their works, their helpers and friends help them, like in the work of Yayati's salvation, his grandsons like Shibi etc. contributed.॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)