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mahabharat 3.120.17: देवताओं सहित सम्पूर्ण लोकों में ऐसी कौन सी बात है जो भगवान श्रीकृष्ण के लिए असह्य है, जो अपने हाथों में अस्त्र-शस्त्र, उत्तम बाण और चक्र धारण करते हैं तथा युद्ध में अतुलनीय पराक्रम दिखाते हैं? 17॥   |   mahabharat अध्याय 3.120: सात्यकिके शौर्यपूर्ण उद्‍गार तथा युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका अनुमोदन एवं पाण्डवोंका पयोष्णी नदीके तटपर निवास   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 120: सात्यकिके शौर्यपूर्ण उद्‍गार तथा युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका अनुमोदन एवं पाण्डवोंका पयोष्णी नदीके तटपर निवास  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.120.17 
किं नाम लोकेष्वविषह्यमस्ति
कृष्णस्य सर्वेषु सदेवकेषु।
आत्तायुधस्योत्तमबाणपाणे-
श्चक्रायुधस्याप्रतिमस्य युद्धे॥ १७॥
 
 
अनुवाद
देवताओं सहित सम्पूर्ण लोकों में ऐसी कौन सी बात है जो भगवान श्रीकृष्ण के लिए असह्य है, जो अपने हाथों में अस्त्र-शस्त्र, उत्तम बाण और चक्र धारण करते हैं तथा युद्ध में अतुलनीय पराक्रम दिखाते हैं? 17॥
 
What is there in all the worlds including the gods, which is unbearable for Lord Shri Krishna, who wields weapons, excellent arrows and a discus in his hands and shows incomparable bravery in battle? 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)