Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.120.12: मैं अर्जुनपुत्र अभिमन्यु का पराक्रम भी जानता हूँ। जब वह युद्धभूमि में खड़ा होता है, तो वह भगवान कृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न के समान दिखाई देता है। वीर साम्ब को अपने पराक्रम से शत्रु सेना को कुचलकर, अपनी दोनों भुजाओं से दु:शासन को उसके रथ और सारथि सहित दबा देना चाहिए। | mahabharat अध्याय 3.120: सात्यकिके शौर्यपूर्ण उद्गार तथा युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका अनुमोदन एवं पाण्डवोंका पयोष्णी नदीके तटपर निवास । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं अर्जुनपुत्र अभिमन्यु का पराक्रम भी जानता हूँ। जब वह युद्धभूमि में खड़ा होता है, तो वह भगवान कृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न के समान दिखाई देता है। वीर साम्ब को अपने पराक्रम से शत्रु सेना को कुचलकर, अपनी दोनों भुजाओं से दु:शासन को उसके रथ और सारथि सहित दबा देना चाहिए।
I also know the prowess of Abhimanyu, the son of Arjun. When he stands on the battlefield, he looks like Pradyumna, the son of Lord Krishna. The valiant Samba, after having crushed the enemy army with his might, should suppress Dushasan along with his chariot and charioteer with his two arms.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥