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mahabharat 3.12.96: उस शुभ और असहाय महिला ने भीम के पैरों को अपनी गोद में ले लिया और उन्हें अपने कोमल हाथों से खुशी से दबाने लगी।   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  3.12.96 
भीमस्य पादौ कृत्वा तु स्व उत्सङ्गे ततोऽबला।
पर्यमर्दत संहृष्टा कल्याणी मृदुपाणिना॥ ९६॥
 
 
अनुवाद
उस शुभ और असहाय महिला ने भीम के पैरों को अपनी गोद में ले लिया और उन्हें अपने कोमल हाथों से खुशी से दबाने लगी।
 
The auspicious and helpless lady took Bhima's feet in her lap and began pressing them happily with her soft hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)