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mahabharat 3.12.93: तब वे सभी प्रतापी पाण्डव अपनी माता के साथ रात्रि में ही उस स्थान से चले गये और हिडिम्बा वन के निकट एक घने जंगल में पहुँच गये।   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  3.12.93 
ते रात्रौ प्रस्थिता: सर्वे सह मात्रा यशस्विन:।
अभ्यगच्छन्महारण्ये हिडिम्बवनमन्तिकात्॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
तब वे सभी प्रतापी पाण्डव अपनी माता के साथ रात्रि में ही उस स्थान से चले गये और हिडिम्बा वन के निकट एक घने जंगल में पहुँच गये।
 
Then all those illustrious Pandavas along with their mother left that place in the night itself and reached a dense forest near Hidimba forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)