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mahabharat 3.12.87: उस समय आर्या कुंती भयभीत होकर रोती हुई पाण्डवों से इस प्रकार बोलीं- 'मैं बड़े संकट में पड़ गई हूँ, मैं अग्नि से घिरी हुई हूँ।   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  3.12.87 
यत्रार्या रुदती भीता पाण्डवानिदमब्रवीत्।
महद् व्यसनमापन्ना शिखिना परिवारिता॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
उस समय आर्या कुंती भयभीत होकर रोती हुई पाण्डवों से इस प्रकार बोलीं- 'मैं बड़े संकट में पड़ गई हूँ, मैं अग्नि से घिरी हुई हूँ।
 
At that time Arya Kunti became frightened and weeping and spoke to the Pandavas thus - 'I have fallen into a great trouble, I am surrounded by fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)