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mahabharat 3.12.86: इतना ही नहीं, जब पाण्डव बालक वारणावत में आर्या कुन्ती के पास सो रहे थे, तब उसने घर में आग लगा दी। ऐसा कुकर्म और कौन कर सकता है?॥86॥   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  3.12.86 
पुन: सुप्तानुपाधाक्षीद् बालकान् वारणावते।
शयानानार्यया सार्धं को नु तत् कर्तुमर्हति॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
इतना ही नहीं, जब पाण्डव बालक वारणावत में आर्या कुन्ती के पास सो रहे थे, तब उसने घर में आग लगा दी। ऐसा कुकर्म और कौन कर सकता है?॥86॥
 
Not only this, when the Pandava children were sleeping with Arya Kunti in Varanavat, he set the house on fire. Who else can commit such a misdeed?॥ 86॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)