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mahabharat 3.12.85: जागने पर कुंतीपुत्र भीम ने सभी सर्पों को उठाकर नीचे फेंक दिया। दुर्योधन ने भीमसेन के प्रिय सारथी को भी अपने बाएं हाथ से मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  3.12.85 
प्रतिबुद्धस्तु कौन्तेय: सर्वान् सर्पानपोथयत्।
सारथिं चास्य दयितमपहस्तेन जघ्निवान्॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
जागने पर कुंतीपुत्र भीम ने सभी सर्पों को उठाकर नीचे फेंक दिया। दुर्योधन ने भीमसेन के प्रिय सारथी को भी अपने बाएं हाथ से मार डाला।
 
On waking up, Kunti's son Bhima picked up all the snakes and threw them down. Duryodhan also killed Bhimasena's favourite charioteer with his left hand. 85.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)