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mahabharat 3.12.84: उसके शरीर के सभी अंगों में विषैले काले सर्पों ने डस लिया; फिर भी शत्रु-संहारक भीमसेन मर न सका।   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  3.12.84 
आशीविषै: कृष्णसर्पैर्भीमसेनमदंशयत्।
सर्वेष्वेवाङ्गदेशेषु न ममार च शत्रुहा॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
उसके शरीर के सभी अंगों में विषैले काले सर्पों ने डस लिया; फिर भी शत्रु-संहारक भीमसेन मर न सका।
 
He was bitten by poisonous black serpents in all his body parts; but the enemy-killer Bhimasena could not die. 84.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)