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mahabharat 3.12.80: वह पापी जिसने भीमसेन के भोजन में कालकूट नामक नवीन, तीक्ष्ण, विशाल और रोमांचकारी विष मिला दिया था। 80.   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  3.12.80 
भोजने भीमसेनस्य पाप: प्राक्षेपयद् विषम्।
कालकूटं नवं तीक्ष्णं सम्भूतं लोमहर्षणम्॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
वह पापी जिसने भीमसेन के भोजन में कालकूट नामक नवीन, तीक्ष्ण, विशाल और रोमांचकारी विष मिला दिया था। 80.
 
The sinner who had mixed in Bhimasena's food a new, sharp, large and thrilling poison called Kalakuta. 80.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)