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mahabharat 3.12.79: मधुसूदन! बचपन में जब पाण्डव ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हुए विद्याध्ययन में लगे रहते थे, किसी को कष्ट नहीं पहुँचाते थे, तब उस दुष्ट ने उन्हें और उनकी माता को राज्य से निकाल दिया था।   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  3.12.79 
य एतानाक्षिपद् राष्ट्रात् सह मात्राविहिंसकान्।
अधीयानान् पुरा बालान् व्रतस्थान् मधुसूदन॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! बचपन में जब पाण्डव ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हुए विद्याध्ययन में लगे रहते थे, किसी को कष्ट नहीं पहुँचाते थे, तब उस दुष्ट ने उन्हें और उनकी माता को राज्य से निकाल दिया था।
 
Madhusudan! Earlier in their childhood, when the Pandavas were observing the vow of celibacy and were engaged in studies, they did not harm anyone, the wicked person had driven them and their mother out of the kingdom.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)