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mahabharat 3.12.77: मधुसूदन! अर्जुन के पास गाण्डीव धनुष है, परन्तु अर्जुन, भीम या आपके अतिरिक्त कोई भी उस पर प्रत्यंचा नहीं चढ़ा सकता (तब भी वे मेरी रक्षा नहीं कर सकेंगे)।॥ 77॥   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  3.12.77 
नाधिज्यमपि यच्छक्यं कर्तुमन्येन गाण्डिवम्।
अन्यत्रार्जुनभीमाभ्यां त्वया वा मधुसूदन॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! अर्जुन के पास गाण्डीव धनुष है, परन्तु अर्जुन, भीम या आपके अतिरिक्त कोई भी उस पर प्रत्यंचा नहीं चढ़ा सकता (तब भी वे मेरी रक्षा नहीं कर सकेंगे)।॥ 77॥
 
Madhusudan! Arjuna has the Gandiva bow, but no one other than Arjuna, Bheema or you can even string it (even then they will not be able to protect me).॥ 77॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)