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mahabharat 3.12.75: वे धनुर्विद्या में श्रेष्ठ हैं और युद्ध में शत्रुओं से अजेय हैं। किन्तु वे दुर्बल धृतराष्ट्रपुत्रों का अत्याचार कैसे सहते हैं?॥ 75॥   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  3.12.75 
नन्विमे धनुषि श्रेष्ठा अजेया युधि शात्रवै:।
किमर्थं धार्तराष्ट्राणां सहन्ते दुर्बलीयसाम्॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
वे धनुर्विद्या में श्रेष्ठ हैं और युद्ध में शत्रुओं से अजेय हैं। किन्तु वे दुर्बल धृतराष्ट्रपुत्रों का अत्याचार कैसे सहते हैं?॥ 75॥
 
They are the best in the art of archery and are invincible in battle against their enemies. But how do they endure the oppression of the weak sons of Dhritarashtra?॥ 75॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)