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mahabharat 3.12.72: जनार्दन! इन पाँच पतियों से उत्पन्न मेरे पाँच शक्तिशाली पुत्र हैं। उनकी देखभाल के लिए भी मेरी सुरक्षा आवश्यक थी ॥ 72॥   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  3.12.72 
पञ्चभि: पतिभिर्जाता: कुमारा मे महौजस:।
एतेषामप्यवेक्षार्थं त्रातव्यास्मि जनार्दन॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
जनार्दन! इन पाँच पतियों से उत्पन्न मेरे पाँच शक्तिशाली पुत्र हैं। उनकी देखभाल के लिए भी मेरी सुरक्षा आवश्यक थी ॥ 72॥
 
Janardan! I have five powerful sons born from these five husbands. My protection was necessary for their care too. ॥ 72॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)