श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  3.12.71 
नन्विमे शरणं प्राप्तं न त्यजन्ति कदाचन।
ते मां शरणमापन्नां नान्वपद्यन्त पाण्डवा:॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
वे अपने पास आए हुए किसी को भी नहीं त्यागते; परंतु इन्हीं पाण्डवों ने मुझ असहाय स्त्री पर, जो शरण में आई थी, तनिक भी दया नहीं दिखाई ॥ 71॥
 
They never abandon anyone who comes to them for shelter; but these same Pandavas did not show even a little mercy to me, a helpless woman, who had sought shelter. ॥ 71॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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