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mahabharat 3.12.69: अपनी पत्नी की रक्षा करने से संतान की रक्षा होती है और संतान की रक्षा करने से आत्मा की रक्षा होती है। 69.   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  3.12.69 
भार्यायां रक्ष्यमाणायां प्रजा भवति रक्षिता।
प्रजायां रक्ष्यमाणायामात्मा भवति रक्षित:॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
अपनी पत्नी की रक्षा करने से संतान की रक्षा होती है और संतान की रक्षा करने से आत्मा की रक्षा होती है। 69.
 
By protecting one's wife one's children are protected, and by protecting one's children one's soul is protected. 69.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)