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mahabharat 3.12.68: यह सनातन धर्ममार्ग है, जिसका सदा पालन पुण्यात्मा पुरुष करते हैं, जिससे दुर्बल पति भी अपनी पत्नी की रक्षा करते हैं। 68.   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  3.12.68 
शाश्वतोऽयं धर्मपथ: सद्भिराचरित: सदा।
यद् भार्यां परिरक्षन्ति भर्तारोऽल्पबला अपि॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
यह सनातन धर्ममार्ग है, जिसका सदा पालन पुण्यात्मा पुरुष करते हैं, जिससे दुर्बल पति भी अपनी पत्नी की रक्षा करते हैं। 68.
 
This is the eternal path of religion, always followed by virtuous men, that even weak husbands protect their wives. 68.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)