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mahabharat 3.12.67: जनार्दन! भीमसेन के बल को धिक्कार है, अर्जुन के गाण्डीव धनुष को भी धिक्कार है, जो उन दुष्ट पुरुषों द्वारा मेरा अपमान होते देखकर भी मुझे सहन करता रहा।   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  3.12.67 
धिग् बलं भीमसेनस्य धिक् पार्थस्य च गाण्डिवम्।
यौ मां विप्रकृतां क्षुद्रैर्मर्षयेतां जनार्दन॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
जनार्दन! भीमसेन के बल को धिक्कार है, अर्जुन के गाण्डीव धनुष को भी धिक्कार है, जो उन दुष्ट पुरुषों द्वारा मेरा अपमान होते देखकर भी मुझे सहन करता रहा।
 
Janardan! Shame on Bhimasena's strength, shame on Arjun's Gandiva bow too, who kept tolerating me even after seeing me being insulted by those wretched men. 67.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)