Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.12.64: मधुसूदन! जब पाण्डव, पांचाल और वृष्णिवंश के वीर योद्धा जीवित थे, तब धृतराष्ट्र के पुत्रों ने दास रूप में मुझसे भोग करने की इच्छा प्रकट की। | mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दासीभावेन मां भोक्तुमीषुस्ते मधुसूदन।
जीवत्सु पाण्डुपुत्रेषु पञ्चालेषु च वृष्णिषु॥ ६४॥
अनुवाद
मधुसूदन! जब पाण्डव, पांचाल और वृष्णिवंश के वीर योद्धा जीवित थे, तब धृतराष्ट्र के पुत्रों ने दास रूप में मुझसे भोग करने की इच्छा प्रकट की।
Madhusudan! While the Pandavas, the Panchalas and the brave warriors of the Vrishni clan were still alive, the sons of Dhritarashtra expressed their desire to enjoy me as slaves. 64.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥