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mahabharat 3.12.63: मैं राजाओं की सभा में अत्यधिक मासिक धर्म के कारण रक्त से लथपथ थी। मुझे उस अवस्था में देखकर धृतराष्ट्र के पापी पुत्रों ने जोर-जोर से हँसकर मेरा उपहास किया। 63.   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  3.12.63 
राज्ञां मध्ये सभायां तु रजसातिपरिप्लुता।
दृष्ट्वा च मां धार्तराष्ट्रा प्राहसन् पापचेतस:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
मैं राजाओं की सभा में अत्यधिक मासिक धर्म के कारण रक्त से लथपथ थी। मुझे उस अवस्था में देखकर धृतराष्ट्र के पापी पुत्रों ने जोर-जोर से हँसकर मेरा उपहास किया। 63.
 
I was soaked in blood due to profuse menstruation in the presence of the kings in the assembly. Seeing me in that condition, the sinful sons of Dhritarashtra laughed loudly and made fun of me. 63.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)