Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.12.55: हे प्रभु! आपके मस्तक से स्वर्ग व्याप्त है और आपके चरणों से पृथ्वी व्याप्त है। ये समस्त लोक आपके उदर में हैं। आप सनातन पुरुष हैं॥55॥   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  3.12.55 
द्यौश्च ते शिरसा व्याप्ता पद्भॺां च पृथिवी प्रभो।
जठरं त इमे लोका: पुरुषोऽसि सनातन:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! आपके मस्तक से स्वर्ग व्याप्त है और आपके चरणों से पृथ्वी व्याप्त है। ये समस्त लोक आपके उदर में हैं। आप सनातन पुरुष हैं॥55॥
 
Lord! The heaven is pervaded by your head and the earth is pervaded by your feet. All these worlds are in your stomach. You are the eternal man. ॥ 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)