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mahabharat 3.12.46: 'दुर्धर्ष वीर! आप मनुष्य हैं और मैं नारायण श्रीहरि हूँ। इस समय हम दोनों नर-नारायण ऋषि इस लोक में आये हैं।'   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  3.12.46 
नरस्त्वमसि दुर्धर्ष हरिर्नारायणो ह्यहम्।
काले लोकमिमं प्राप्तौ नरनारायणावृषी॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
'दुर्धर्ष वीर! आप मनुष्य हैं और मैं नारायण श्रीहरि हूँ। इस समय हम दोनों नर-नारायण ऋषि इस लोक में आये हैं।'
 
'Durdharsh Veer! You are a human and I am Narayan Shri Hari. At this time both of us, Nara-Narayan Rishis have come to this world. 46.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)