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mahabharat 3.12.38: वार्ष्णेय! सृष्टि के आदि में आपके कमल-बीज से चराचरगुरु ब्रह्मा उत्पन्न हुए, जिनकी रचना यह सम्पूर्ण जगत है। 38॥   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.12.38 
युगादौ तव वार्ष्णेय नाभिपद्मादजायत।
ब्रह्मा चराचरगुरुर्यस्येदं सकलं जगत्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
वार्ष्णेय! सृष्टि के आदि में आपके कमल-बीज से चराचरगुरु ब्रह्मा उत्पन्न हुए, जिनकी रचना यह सम्पूर्ण जगत है। 38॥
 
Varshney! In the beginning of creation, Characharguru Brahma was born from your lotus seed, whose creation is this entire world. 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)