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mahabharat 3.12.27: हे भूतनाथ! आपने सूर्य के रथ पर आसीन होकर आकाश और नभ में फैले हुए भगवान भास्कर को भी अपने तेज से अत्यन्त प्रकाशित कर दिया है। 27॥   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.12.27 
सम्प्राप्य दिवमाकाशमादित्यस्यन्दने स्थित:।
अत्यरोचश्च भूतात्मन् भास्करं स्वेन तेजसा॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे भूतनाथ! आपने सूर्य के रथ पर आसीन होकर आकाश और नभ में फैले हुए भगवान भास्कर को भी अपने तेज से अत्यन्त प्रकाशित कर दिया है। 27॥
 
Ghostman! You, seated on the chariot of the Sun and spread across the sky and the sky, have illuminated even Lord Bhaskar immensely with your glory. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)