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mahabharat 3.12.24: जनार्दन! उस समय आपने प्रत्येक यज्ञ में दक्षिणा के रूप में एक करोड़ स्वर्ण मुद्राएँ अलग से दी थीं। 24॥   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.12.24 
शतं शतसहस्राणि सुवर्णस्य जनार्दन।
एकैकस्मिंस्तदा यज्ञे परिपूर्णानि भागश:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जनार्दन! उस समय आपने प्रत्येक यज्ञ में दक्षिणा के रूप में एक करोड़ स्वर्ण मुद्राएँ अलग से दी थीं। 24॥
 
Janardan! At that time, you gave one crore gold coins separately as Dakshina in every Yagya. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)