Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.12.17: केशव! आप क्षेत्रज्ञ (सबकी आत्मा) हैं, सम्पूर्ण प्राणियों के आदि और अन्त हैं, तप, यज्ञ और सनातन सत्ता के आधार हैं॥ 17॥ | mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्षेत्रज्ञ: सर्वभूतानामादिरन्तश्च केशव।
निधानं तपसां कृष्ण यज्ञस्त्वं च सनातन:॥ १७॥
अनुवाद
केशव! आप क्षेत्रज्ञ (सबकी आत्मा) हैं, सम्पूर्ण प्राणियों के आदि और अन्त हैं, तप, यज्ञ और सनातन सत्ता के आधार हैं॥ 17॥
Keshav! You are the knower of the field (the soul of all), the beginning and end of all beings, the foundation of austerities, sacrifices and the eternal being.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥