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श्लोक 3.12.136  |
वैशम्पायन उवाच
इत्युक्तेऽभिमुखा वीरा वासुदेवमुपास्थिता:।
तेषां मध्ये महाबाहु: केशवो वाक्यमब्रवीत्॥ १३६॥ |
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| अनुवाद |
| वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! धृष्टद्युम्न के ऐसा कहने पर वहाँ बैठे हुए वीर योद्धा भगवान श्रीकृष्ण की ओर देखने लगे। उनके मध्य में बैठे हुए पराक्रमी केशव ने उनसे ऐसा कहा। 136. |
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| Vaishampayana says - Janamejaya! When Dhrishtadyumna said this, the brave warriors sitting there started looking at Lord Krishna. The powerful Keshav sitting in their midst said this to him. 136. |
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इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि अर्जुनाभिगमनपर्वणि द्रौपद्याश्वासने द्वादशोऽध्याय:॥ १२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत अर्जुनाभिगमनपर्वमें द्रौपदी-आश्वासनविषयक बारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२॥
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